क्राईम

षड्यंत्र की परछाई: जब रक्षक ही बन गए भक्षक

समस्तीपुर: पैसों की हवस और अनैतिक संबंधों की कोख से उपजे लालच ने एक बार फिर मानवीय संवेदनाओं का कत्ल कर दिया है। अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे एक पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के भविष्य को रुपयों की खातिर एक उम्रदराज शख्स के हाथों गिरवी रख दिया। लेकिन लालच की आग शांत नहीं हुई। भूमाफियाओं के साथ साठगांठ और जालसाजी के धंधे में नाकाम होने के बाद, अब यह कहानी एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहाँ खून के रिश्ते ही खून के प्यासे हो गए हैं।

मदद का हाथ और पीठ में खंजर

कहानी में नया मोड़ तब आया जब उस पीड़ित नौकरीपेशा युवक ने, तमाम कड़वाहटों के बावजूद, अपने गाँव के एक रिश्ते के भाई की शादी अपनी ही चचेरी साली से करवा दी। नियति का खेल देखिए, जिस युवक ने घर बसाने में मदद की, वही युवक आगे चलकर उसकी बर्बादी का कारण बनने वाला था।
शादी के कुछ समय बाद, उक्त युवक का अपने पट्टीदारों से विवाद हुआ और मामला थाने तक पहुँच गया। गिरफ्तारी के डर से वह दर-दर भटकने लगा। यहाँ नौकरीपेशा युवक ने इंसानियत दिखाते हुए उसे अपने ही घर में पनाह दे दी। उसे क्या पता था कि वह जिसे साया दे रहा है, वही उसकी जड़ों को खोखला कर देगा।

अवैध संबंध और नफरत की बिसात

नौकरीपेशा युवक अपनी जिम्मेदारियों के कारण अक्सर घर से बाहर रहता था। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर उसके शरणार्थी भाई और उसकी पत्नी के बीच अनैतिक संबंध स्थापित हो गए। विश्वास की नींव तब दरक गई जब युवक को इस विश्वासघात की भनक लगी। उसने तत्काल प्रभाव से उस युवक को घर से बाहर निकाल दिया और अपनी पत्नी पर सख्त पाबंदियाँ लगा दीं।
लेकिन प्रेम और वासना जब प्रतिशोध की शक्ल लेती है, तो वह विवेक को निगल जाती है। अपमान का बदला लेने के लिए पत्नी और उसके प्रेमी ने एक खौफनाक साजिश की बुनियाद रखी।

हिटलर की विचारधारा और मौत का सामान

इस साजिश में उन्होंने मोहरा बनाया उस शख्स को, जिसे रिश्तों की मर्यादा का सबसे बड़ा संरक्षक होना चाहिए था— यानी चचेरा ससुर (लड़की का पिता)। वह शख्स, जो पहले ही अपनी बेटी का सौदा कर चुका था, अब अपने ही दामाद की मौत का सौदा करने को तैयार हो गया। सूत्रों की मानें तो यह ससुर सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि एक शातिर दिमाग वाला व्यक्ति है। वह एडॉल्फ हिटलर की जीवनी और उसकी रणनीतियों का शौकीन है। वह घंटों इस बात पर शोध करता था कि किसी की हत्या करके कानून की नजरों से कैसे साफ-साफ बचा जा सकता है। इस पूरे हत्याकांड की ‘ब्लूप्रिंट’ (खाका) उसी ने तैयार की थी।

एक लाख की सुपारी और दो दर्जन गोलियां

साजिश को अंजाम देने के लिए संसाधनों की कमी नहीं रहने दी गई। ससुर ने अपने रसूख और अवैध संपर्कों का इस्तेमाल कर करीब 1 लाख रुपये में अत्याधुनिक हथियार और दो दर्जन से अधिक जिंदा कारतूस अपने दामाद’ (प्रेमी युवक) को मुहैया कराए। यह केवल एक हत्या की योजना नहीं थी, बल्कि एक ऐसी वारदात की तैयारी थी जो इलाके को दहला दे।

क्या वह शातिर ससुर कानून की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहा? क्या हिटलर की चालें उसे सलाखों के पीछे जाने से बचा पाईं?

पढ़िए हमारी अगली विशेष कड़ी में- “खून से सनी मोहब्बत: एक के बाद एक कई कत्ल।”

सच्चाई की तह तक, सिर्फ साहित्य सौरभ मासिक खबर पत्रिका के साथ।

अस्वीकरण: यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ और स्थान लेखक की कल्पना की उपज हैं। यदि इस कहानी का किसी जीवित या मृत व्यक्ति, वास्तविक घटना या किसी स्थान से कोई संबंध पाया जाता है, तो वह केवल एक संयोग मात्र होगा।”

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