उजियारपुर में इंसानियत शर्मसार: साइकिल चोरी के शक में युवक को बांधकर बेरहमी से पीटा, 10 हजार रूपए भी छीने, 03 दिनों बाद तस्वीर हुई वायरल

समस्तीपुर (उजियारपुर): जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत उजियारपुर बाजार में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। साइकिल चोरी के आरोप में कुछ लोगों ने एक युवक को पकड़कर उसके हाथ-पैर बांध दिए और बीच बाजार में जमकर पिटाई कर दी। इस घटना के दौरान हैरानी की बात यह रही कि, घटना के दौरान मौके पर मौजूद सैकड़ों की संख्या में लोग तमाशबीन बने रहे, लेकिन किसी ने भी युवक को बचाने की कोशिश नहीं की। अब तीन दिन बाद उक्त युवक की तस्वीर वायरल होने लगी है।

इस घटना के संबंध में सुत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त युवक पर साइकिल चोरी का आरोप लगाते हुए कुछ स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे सार्वजनिक रूप से बांधकर डंडों और लात-घूंसों से पीटा गया। सुत्रों का बताना है कि, इस दौरान मारपीट करने वाले लोगों ने युवक की जेब से करीब 10 हजार रुपये भी छीन लिए।
अचानक हुई इस घटना से बाजार में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन भीड़ में से किसी ने भी आगे बढ़कर इस घटना का विरोध नहीं किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक बार-बार अपनी बेगुनाही की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई।
उक्त युवक उजियारपुर थाना क्षेत्र के ही अंडाहा गांव का रहने वाला बताया गया है। घटना के संबंध में सुत्रों का बताना है कि, आरोपी युवक उजियारपुर बाजार स्थित एक पेड़ के नीचे धूप से बचने के लिए एक साईकिल का सहारा लेकर खड़ा हो गया। जिसे कुछ स्थानीय लोगों ने साईकिल चोर समझकर बेरहमी से पिटाई कर दिया। स्थानीय लोगों का बताना है कि, विगत कुछ दिनों में उजियारपुर बाजार से कई साइकिलें चोरी हो चुकी है।
जिसके कारण स्थानीय लोग अंजान युवक को साईकिल के पास खड़ा देखकर उसे साईकिल चोर समझकर बेरहमी से पीट दिया। सुत्रों का बताना है कि, भीड़ में शामिल किसी व्यक्ति ने मारपीट के दौरान उक्त युवक के जेब से 10 हजार रूपए भी निकाल लिया। हालांकि “साहित्य सौरभ” मासिक खबर पत्रिका वायरल हो रहे इस तस्वीर के सत्यता की पुष्टि नही करता है।
बड़ा सवाल:
इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या अब कानून अपने हाथ में लेना आम बात हो गई है? और जब किसी के साथ अन्याय होता है, तो लोग मूकदर्शक क्यों बने रहते हैं?






