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चाय के साथ सिगरेट पीना क्यों बन रहा है “साइलेंट ज़हर”? खासकर स्कूली व कॉलेज के बच्चे ही क्यों बन रहे हैं इस लत के आदी

नई दिल्ली: भारत में “चाय-सिगरेट” या “चाय-सुट्टा” का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऑफिस, कॉलेज, चौक-चौराहों और चाय की दुकानों पर लोग अक्सर चाय के साथ सिगरेट पीते नजर आ जाते हैं। कई लोग इसे तनाव दूर करने या ताजगी पाने का तरीका मानते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह आदत शरीर को धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकती है।

शरीर पर कैसे पड़ता है असर ?

चाय में मौजूद कैफीन और सिगरेट में मौजूद निकोटिन दोनों ही शरीर को उत्तेजित करते हैं। जब दोनों का सेवन एक साथ किया जाता है तो, इसका असर कई गुना बढ़ जाता है। इससे दिल की धड़कनें तेज हो जाती है, और ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है साथ ही शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है।

कैंसर का बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म चाय के साथ सिगरेट पीने से मुंह, गले और भोजन नली (Esophagus) को अधिक नुकसान पहुंचता है। सिगरेट का धुआं और गर्म पेय पदार्थ मिलकर कोशिकाओं को क्षति पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

दिल और फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव

सिगरेट पहले से ही फेफड़ों और हृदय के लिए खतरनाक मानी जाती है। वहीं चाय में मौजूद कैफीन रक्तचाप को बढ़ा सकता है। दोनों का कॉम्बिनेशन हार्ट अटैक, स्ट्रोक और सांस संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ाने वाला माना जाता है।

बढ़ सकती है लत

विशेषज्ञों का कहना है कि निकोटिन और कैफीन मिलकर दिमाग को इस आदत का आदी बना देते हैं। धीरे-धीरे व्यक्ति को हर चाय के साथ सिगरेट की craving होने लगती है। यही कारण है कि कई लोग दिनभर में कई बार “चाय-सुट्टा ब्रेक” लेने लगते हैं।

पेट और पाचन पर असर

खाली पेट चाय और सिगरेट लेने से एसिडिटी, गैस, जलन और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अधिक चाय शरीर में पानी की कमी भी पैदा कर सकती है, जबकि सिगरेट पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाती है।

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ट्रेंड

सोशल मीडिया और फिल्मों में “चाय-सुट्टा” को स्टाइल के रूप में दिखाया जाता है, जिसके कारण युवाओं में यह आदत तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह दिखावे की आदत भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकती है।

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार:

चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत तुरंत छोड़नी चाहिए। तनाव कम करने के लिए व्यायाम, योग और पर्याप्त नींद को अपनाना चाहिए। अधिक चाय और धूम्रपान दोनों से दूरी बनाना स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। यदि लत ज्यादा हो चुकी है तो डॉक्टर या काउंसलर की मदद लेनी चाहिए। कुछ मिनट की “चाय-सुट्टा” राहत शरीर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है। यह आदत धीरे-धीरे कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और मानसिक निर्भरता जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए समय रहते सावधान होना ही सबसे बेहतर उपाय है।

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