उजियारपुर में सोलर स्ट्रीट लाइट योजना पर सवाल, लाखों खर्च के बाद भी गांव अंधेरे में

उजियारपुर (समस्तीपुर): बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना प्रखंड क्षेत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। Bihar Renewable Energy Development Agency के तहत लागू इस योजना का उद्देश्य गांवों की गलियों को रोशन करना था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

उजियारपुर प्रखंड की कुल 28 पंचायतों में वार्ड स्तर पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, अब तक यह योजना अधूरी है, और जहां लाइट लगाई भी गई है, वहां अधिकांश जगहों पर वह शोपीस बनकर रह गई हैं।
घटिया सामग्री और अधूरी व्यवस्था का आरोप
सूत्रों के अनुसार, एक सोलर स्ट्रीट लाइट की लागत करीब 35,500 रुपये है। इसके बावजूद एजेंसियों द्वारा निम्न स्तर के उपकरण लगाए जाने का आरोप है। कई वार्डों में लाइट लगने के कुछ ही दिनों बाद बंद हो गई, जिससे योजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत का बुरा हाल
प्रखंड के लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश वार्डों में अंधेरा पसरा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही गलियां फिर अंधेरे में डूब जाती हैं।
“एक माह भी नहीं जली लाइट”
वार्ड संख्या 10 के एक स्थानीय निवासी सह राजद नेता परवेज आलम ने बताया कि, सोलर लाइट लगने के बाद एक माह भी सही तरीके से नहीं जली। इसकी शिकायत पंचायत सचिव और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को मौखिक रूप से दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
गलत जगहों पर भी लगाए गए लाइट
ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर जहां आबादी नहीं है, या आवश्यकता नहीं थी, वहां पर भी सोलर लाइट लगा दी गई है। इसे जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश बताया जा रहा है।
जांच की मांग तेज
राजद नेता परवेज आलम ने योजना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो दर्जनों वार्डों में लगी सोलर लाइट सिर्फ “दिखावा” साबित होगी।
जिला स्तर पर शिकायत की तैयारी
राजद नेता परवेज आलम ने यह चेतावनी भी दिया है, कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वह जिला स्तरीय अधिकारियों से इस संबंध में लिखित शिकायत करेंगे।
